Aliganj Assembly Seat: सपा का रहा है गढ़, क्या BJP बरकरार रख पाएगी कब्जा?




स्टोरी हाइलाइट्स 1993 से 2017 तक, बस दो बार हारी है सपा बीजेपी के सत्यपाल सिंह राठौर हैं विधायक एटा जिला मुख्यालय से 52 किलोमीटर दूर है अलीगंज. अलीगंज को 1747 में याकूत खान ने बसाया था. अलीगंज विधानसभा सीट भी है. 1990 के दशक तक ये विधानसभा सीट दस्यु प्रभावित रही है. अलीगंज में कभी कुख्यात दस्यु छविराम, अलवर, भूरा, पोथी जैसे डकैतों की दहशत होती थी. 1990 का दशक खत्म होते-होते दस्युओं का सफाया हो गया. काली नदी के किनारे बसे अलीगंज विधानसभा क्षेत्र तम्बाकू की पैदावार के लिए प्रसिद्ध है. यहां के 65  फीसदी किसान तम्बाकू की खेती पर निर्भर हैं.   

राजनीतिक पृष्ठभूमि

अलीगंज विधानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो ये सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है. साल 1993,1996, 2002 और 2012 के विधानसभा चुनाव में अलीगंज सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जीते. यहां साल 2007 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रत्याशी अवध पाल सिंह यादव ने जीत दर्ज की थी. साल 1993 से 2017 के विधानसभा चुनाव तक की बात करें तो सपा केवल दो बार ही ये सीट पर हारी है और वो भी करीबी अंतर से.

साल 2017 का जनादेश

अलीगंज विधानसभा सीट से साल 2017 के विधानसभा चुनाव में कुल 14 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवारों के बीच ही मुकाबला रहा. अलीगंज विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में जहां बीजेपी के सत्यपाल सिंह राठौर को 88695 वोट मिले थे. बीजेपी के सत्यपाल के निकटतम प्रतिद्वंदी सपा प्रत्याशी रामेश्वर सिंह यादव को 74844 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे. बसपा के अवधपाल सिंह यादव को 46275 वोट मिले थे और वे तीसरे स्थान पर रहे थे. 

सामाजिक ताना-बाना

अलीगंज विधानसभा सीट यादव बाहुल्य सीट है. इस सीट पर क्षत्रिय, शाक्य और लोधी वोटर भी अच्छी तादाद में हैं. बघेल, तेली, राठौर और मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में हैं. अलीगंज विधानसभा सीट उन सीटों में शामिल है जहां चुनाव का परिणाम जातीय समीकरणों पर निर्भर करता है. मुद्दों पर यहां जातीय समीकरण भारी पड़ते रहे हैं. इस सीट पर चार बार सपा, एकबार बसपा और एक ही बार बीजेपी के उम्मीदवार ने इस सीट से जीत हासिल की है. 

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

अलीगंज विधानसभा सीट से विधायक सत्यपाल सिंह राठौर हाईस्कूल तक पढ़े हैं. सत्यपाल सिंह ने साल 2017 के चुनाव में सपा से विधायक रहे और दबंग नेताओं में गिने जाने वाले रामेश्वर सिंह यादव को हराकर सभी को चौंकाया था. सत्यपाल सिंह राठौर बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर बसपा में भी शामिल हुए थे. बाद में वे बीजेपी में लौट आए थे.

सत्यपाल सिंह राठौर ठेकेदार हैं और इनके पेट्रोल पंप भी हैं. सत्यपाल सिंह राठौर के तीन पुत्र और एक पुत्री हैं. अलीगंज विधायक सत्यपाल सिंह ढाई सौ करोड़ के विकास कार्य कराने का दावा करते हैं. सत्यपाल सिंह 12 करोड़ की लागत से बना आईटीआई कॉलेज, स्टेडियम और सुगम यातायात के लिए अलीगंज में बस स्टैंड के निर्माण को अपनी प्रमुख उपलब्धि बताते हैं.

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